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Showing posts from March, 2019

शादीशुदा मर्द से प्रेम, कोर्ट ने दी साथ रहने की इजाज़त- प्रेस रिव्यू

राजस्थान हाई कोर्ट ने 26 साल की महिला को एक शादीशुदा मर्द के साथ रहने की इजाज़त दी है. कोर्ट ने यह अनुमति उस शादीशुदा व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करने के बाद दी है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि महिला को उसके मां-बाप ने बंधक बना लिया है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विनित कुमार माथुर की बेंच इस मामले की सुनावई कर रहे थे. याचिकाकर्ता मोइनुद्दीन अब्बासी ने कहा कि उन्होंने 28 जुलाई, 2018 को 26 साल की रूपल सोनी से शादी की थी. उन्होंने यह भी कहा कि सोनी के परिवार ने उन्हें बंधक बना कर रखा है. इस पर कोर्ट ने पुलिस को अदालत के समक्ष महिला को पेश करने का आदेश दिया था. बीते 13 मार्च को सोनी ने कोर्ट को कई अन्य बातें बताईं. सुनवाई के दौरान अदालत को यह बताया गया कि याचिकाकर्ता पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं. बावजूद इसके उन्होंने सोनी से शादी कर ली. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने उस महिला को उदयपुर में सरकारी देखरेख में रखने को कहा था. कोर्ट ने आदेश दिया है कि "महिला याचिकाकर्ता के साथ अपने रिश्ते जारी रखना चाहती हैं. व...

中国成都七中实验学校食物丑闻背后的政府公信力“塔西佗陷阱”

进入自媒体时代,中国的公众事件 往往在社交媒体平台爆发和发酵,随后倒逼官方表态和调查。今年一系列公共危机事件中,政府的处置能力一路拉拽着公信力疾驰而下。近期中国四川一所学校“示范食堂”的食物丑闻应急处理再次将地方政府岌岌可危的公信力呈现在公众面前。 自3月12日开始,中国社交媒体上关于四川省学费昂贵的私立学校成都七中实验学校的“过期食品”文章和图片迅速传播,搅动民间舆论场。一时间,愤怒和疑惑情绪充斥互联网。人们在社交网络奔走相告,想要真相和说法。 官方和其所严控的传统媒体保持沉默数日。 此后官方宣布的调查结果广受质疑 ,政府公信力再次遭受打击。学者称,当地政府陷入“塔西拓陷阱”。 “塔西佗陷阱”(Tacitus Trap)是当代学者引申、演绎出的概念,指当政府部门或某一组织失去公信力时,无论说真话还是假话,做好事还是坏事,都会被认为是说假话、做坏事。 3月12日伊始,一 批在社交媒体上迅速流传的“发霉食物” 照片引发舆论关注和公众愤怒。接下来的一两天,家长与官方“激烈”对话,官方使用辣椒水和催泪弹驱散人群。事态扩大,引发全网关注后,传统媒体和官方微博号开始发布通告。 3月17日,官方的通报显示,成都七中实验学校校长被解聘,要求学校落实校长陪餐制;粉条样品有霉斑不合格,其余17个样品经检测未发现问题; 而另外三人因 "造假"食材照片 ,涉嫌寻衅滋事罪被捕。 成都警方称:“文某某、王某某等3人于3月12日晚10时许,强行进入小学,撕破部分食材包装,抛洒踩踏食材,就地取物撒在食材上(姜黄粉撒在鸡翅,毛肚上撒红曲米),改变了食材原有形态, 并故意摆拍成为照片视频,上传到网上。” "中国食品安全面临巨大挑战" BBC解疑:发霉的食物还能吃吗? 但官方沉默后的“权威”发布并未赢回公信力 ,反而引来质疑声一片。 该学校一位不愿具名的家长对BBC中文说,“对现在的处理结果不满意。”他说,17日所谓的官方发布会,并没有家长参加。 而官方的视频证据为什么最后才拿出来? 该家长说,他加入了几个社交媒体上的家长群,这些家长群的总人数约有4000人,在校学生约6000人。“如果我们有家长被处理,我们会反应很大。我们没有家长说被抓了。” BBC中文记者试图向成都警方求证, 但截至发稿前,电话一直无人接听。 来自...

सैनिकों को करोड़ों रुपये दान करने का मुर्तज़ा अली का दावा कितना सही?- फ़ैक्ट चेक

मुंबई में रहने वाले मुर्तज़ा अली अपने एक बड़े दावे की वजह से इन दिनों सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. उन्होंने दावा किया है कि वो अपनी कमाई से 110 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में देने वाले हैं. नेत्रहीन मुर्तज़ा अली चाहते हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल उन भारतीय सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए किया जाये, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी है. सोशल मीडिया पर उनके इस दावे पर आधारित बहुत सारी ख़बरें शेयर की जा रही हैं. कई बड़े मीडिया संस्थानों ने उनके इस दावे को ख़बर बनाया है. लोग उनके इस फ़ैसले की ख़ुले दिल से तारीफ़ भी कर रहे हैं. इसके अलावा भारत के परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ मुर्तज़ा अली की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर जगह-जगह शेयर की गई है. लेकिन लोगों में ये जिज्ञासा है कि ख़ुद को एक आम इनवेंटर यानी अन्वेषक बताने वाले मुर्तज़ा अली इतनी बड़ी रक़म दान में कैसे दे रहे हैं? इसके जवाब में मुर्तज़ा अली ने बीबीसी से कहा, "इस पैसे का सोर्स मुझे लोगों को बताने की क्या ज़रूरत है. मैं स्वेच्छा से अपने पैन कार्ड और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ ये पैसा पीएम को देने वाला हू...